भारतीय जवानों के लिए पाकिस्तानी बंदूक में 'चीनी बुलेट' बनी जानलेवा, गृह मंत्रालय ने किया खुलासा

बहादुर भारतीय जवानों आपने भारत को सुरक्षित रखने के लिए दुश्मनो से लड़ते है.बात 31 दिसम्बर की है जब जैश-ए-मोहमद के आतंकियो ने सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर दिया था. देर रात अचानक हुए इस हमले में सुरक्षा बल के 5 जवान शहीद हुए थे. हालांकि जवाबी कार्रवाई में सेना ने नजदीक ही एक बिल्डिंग में छिपे तीनों आतंकियों को मार गिराया था. इस घटना में खास बात ये है कि शहीद 5 जवानों में से दो जवानों ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी हुई थी. ये जवान कैंप के गेट पर पहरा दे रहे थे. बावजूद इसके आतंकियों की गोली उनकी जैकेट को भेदते हुए सीने में जा लगी.

जानकारी के मुताबिक, बुलेट प्रूफ जैकेट के बावजूद गोली लगने से हुई जवानों की मौत पर सुरक्षा एजेंसियों से लेकर गृह मंत्रालय तक में हलचल मच गई. पूरे मामले की जांच की गई कि कहीं जैकेट में ही तो कोई खराबी नहीं है, लेकिन जैकेट हर टैस्ट में खरी उतरीं. बाद में जवानों को लगी गोलियों की जांच की गई. जांच में पाया गया कि आतंकियों ने बुलेट प्रूफ जैकेट को भेदने वाली खास किस्म की गोलियों का इस्तेमाल किया था. सेना ने जांच की कि आखिर आतंकियों के पास इस तरह की गोलियां कहां से आईं. जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि आतंकियों का मददगार कोई और नहीं बल्कि चीन है. जांच से पता चला है कि गोलियों में लगा खास तरह का स्टील चीन तैयार करता है. इसके अलावा सुरक्षा सूत्र बताते हैं कि आतंकियों के पास वे हथियार मिले थे जो अमेरिका ने पाकिस्तान के सेना को सप्लाई किए थे. गोली के आगे लगा स्टील ज्यादा अपने लक्ष्य में ज्यादा ताकत के साथ लगता है और ज्यादा नुकसान पहुंचाता है.

आपो बताते चले, गृह मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, एके-47 राइफल में इस्तेमाल की जाने वाली गोली का अगला हिस्सा अब तक तांबा का बना होता है जो बुलेट प्रूफ जैकेट को भेद नहीं पाता था और जवान डटकर मैदान में खड़े रहते थे. लेकिन चीनी स्टील वाली ये नई बुलेट पहली बार कश्मीर में जवानों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल हुईं और बुलेट प्रूफ़ जैकेट नाकाम रहीं.अब सुरक्षा एजेंसियों को खतरा इस बात का है कि देश के बड़े राजनेता और VVIP की सुरक्षा के लिए भी बुलेट प्रूफ कारें लगी हैं, लेकिन आतंकियों की गोली अब उन्हें भी आसानी से निशाना बना सकती हैं. इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां फिर से जवानों, राजनेताओं और वीवीआईपी की सुरक्षा की समीक्षा कर रही हैं, ताकि उन्हें आतंकियों के नए मंसूबों से महफूज रखा जा सके.