निर्वाचन आयोग तीन राज्यों में आज कर सकता है चुनाव की तारीखों की घोषणा

चुनाव आयोग आज त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड के विधानसभा चुनावों की ति‍थियों का ऐलान कर सकता है. तीनों राज्‍यों में संभवत: फरवरी में चुनाव हो सकते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, इन तीनों उत्‍तर-पूर्वी राज्‍यों में एक चरण में ही चुनाव कराए जा सकते हैं.तीनों राज्यों में एक ही चरण में होगा मतदान, तारीख अलग अलग हो सकती है. बता दें मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा में होना है विधानसभा चुनाव होना है. तीनों राज्यों में 60-60 विधानसभा की सीट है.

आपको बता दे, त्रिपुरा में जहां लेफ्ट की सरकार है, वहीं, मेघालय में कांग्रेस सत्‍ता में है, जबकि नागा पीपुल्स फ्रंट-लीड डेमोक्रेटिक गठबंधन नागालैंड में सत्‍तासीन है. डेमोक्रेटिक गठबंधन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा समर्थित है.वहीं अगर बात पूर्वोत्तर राज्यों की करें तो यहां आजादी के बाद से दशकों तक कांग्रेस का दबदबा रहा है. मेघालय में 60 सदस्यीय 9वीं विधानसभा का गठन एक मार्च, 2013 को हुआ था और इसका कार्यकाल छह मार्च, 2018 को समाप्त हो रहा हैै.

आपको बताते चले, मेघालय में मतदाता सूची में पंजीकृत मतदाताओं के मामले में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है. राज्य में 50.4 प्रतिशत महिला मतदाता हैं. मतदाता सूची में 18,30,104 मतदाताओं के नाम हैं जिनमें से 9,23,848 महिलाएं हैं.बता दें कि इंडिजिनियस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के साथ गठजोड़ करेगी जबकि भगवा दल ने कहा कि इस संबंध में बातचीत अब भी चल रही है. त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल इस साल छह मार्च को समाप्त होगा

खबरों के मुताबिक, नागालैंड में नागाल पीपुल्स फ्रंट की सरकार है. टी आर जेलियांग के नेतृत्व में बनी इस सरकार को बीजेपी का भी समर्थन है.यानी नागालैंड में एनडीए का ही मुख्यमंत्री है. 2013 में एनसीपी के चार विधायकों में से तीन विधायकों ने बीजेपी में शामिल होने का फैसला कर लिया था और बीजेपी सरकार को समर्थन दे रही है,खारकोंगर ने बताया कि मतदाता सूची में कुल 8,276 नाम हटाए गए और 6,645 आवदेन खारिज कर दिए गए. राज्य सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 32 लाख की आबादी वाले मेघालय में साक्षरता की दर 74.4 प्रतिशत है.दरअसल बीजेपी के एजेंडे में नॉर्थ ईस्ट काफी उपर है. बीजेपी की रणनीति लोकसभा चुनाव को लेकर भी यही है कि ज्यादा तादाद में इन इलाकों से सीटें जीती जाए.