पहली बार मीडिया के सामने आने वाले SC के 4 बड़े जज बोले -सुप्रीम कोर्ट हो रहा है गड़बड़

आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट में पदस्थ 4 वरिष्ठ जजों ने प्रेस कांफ्रेंस की. इन जजों ने न्यायपालिका में जारी भ्रष्टाचार पर अपनी बात रखी.प्रेस कांफ्रेंस करने वाले सुप्रीम कोर्ट के ये 4 वरिष्ठ जज हैं जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर, जस्टिस रंगन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ. यह कांफ्रेंस जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर के आवास पर आयोजित हुई. भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब देश के वरिष्ठतम जजों में से 4 जज मीडिया के जरिए देश के सामने मुखातिब हुए.

जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जजों ने मीडिया को संबोधित किया. चीफ जस्टिस के बाद दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कभी-कभी होता है कि देश के सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था भी बदलती है. सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी.

खबरों के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जन्मे जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर केरल और गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं. उन्हें वकालत विरासत में मिली. भौतिकी विज्ञान में स्नातक करने के बाद उन्होंने 1976 में आंध्र युनिवर्सिटी से कानून की डिग्री हासिल की. अक्टूबर, 2011 में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे.

आपको बताते चले, इसी तरह जस्टिस रंजन गोगोई असम से आते हैं और वह सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जजों में शामिल हैं, और वरिष्ठता के आधार पर अक्टूबर, 2018 में वह देश की सबसे बड़ी अदालत में जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायर होने के बाद मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं. ऐसा हुआ तो वह भारत के पूर्वोत्तर राज्य से इस शीर्ष पद पर काबिज होने वाले पहले जस्टिस होंगे. जस्टिस मदन भीमराव लोकुर की स्कूली शिक्षा नई दिल्ली में हुई. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास (ऑनर्स) में स्नातक की डिग्री हासिल की. बाद में उन्होंने दिल्ली से ही कानून की डिग्री हासिल की. 1977 में उन्होंने अपने वकालत करियर की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में वकालत की.

रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस कुरियन जोसेफ ने 1979 में अपनी वकालत करियर की शुरुआत की. सन 2000 में वह केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चुने गए. इसके बाद फरवरी, 2010 में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. 8 मार्च, 2013 को वह सुप्रीम कोर्ट में जज बने.