बच्ची को दफनाने के लिए श्माशान ले जा रहे थे, रास्ते में हो गया ऐसा चमत्कार

कहते है जिसकी रक्षा भगवान कर रहा है। उसको मारने वाला कोई हो ही नहीं सकता। यह कहावत आज बिल्कुल सही साबित हुई है।जी है कुछ ऐसा ही इस जगह में ठीक ऐसा ही एक चौंका देने वाला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में सामने आया है। दरअसल शिवम द्विवेदी नाम के व्यक्ति की पत्नी ने नवंबर में बच्ची को जन्म दिया था. कुछ दिनों बाद बच्ची की तबियत खराब हो गई तो उसे अस्पताल ले जाया गया। आपको बता दे, हालत सुधरने पर उसे घर ले आए. लेकिन फिर दोबारा उस मासूम की तबियत इतनी बिगड़ी कि उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. बच्ची के पिता के मुताबिक उसके दिमाग और कुछ अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. उसे मृत समझ लिया गया. बच्ची को दफनाने के लिए श्माशान ले जाया गया तभी कुछ ऐसा हुआ जिसे देख लोग चकित रह गए.

आपको बताते, चले की लखनऊ के रहने वाले शिवम द्विवेदी की पत्नी स्वाति द्विवेदी ने 13 नवंबर को ग्वालियर कमलाराजा अस्पताल में ऑपरेशन से एक बच्ची को जन्म दिया. शिवम ने बताया कि कुछ दिन में स्वाति को अस्पताल से डिस्चार्ज मिल गया. वह ग्वालियर में ही अपने मायके में रहने लगी. बच्ची पूरी तरह स्वस्थ थी. 1 जनवरी को बच्ची को खांसी-जुकाम होने पर उसे डॉक्टर के पास ले गए. डॉक्टर ने दवा तो दे दी लेकिन रात में बच्ची की तबियत काफी बिगड़ गयी थी.

जानकारी के मुताबिक, उनके परिवार वाले बोल रहे थे की घर पर बच्ची की ना तो सांस चल रही थी और ना ही उसके शरीर में कोई हलचल थी. परिजनों ने बच्ची को मृत समझ लिया. और उसे अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले गए. शिवम ने आगे बताया कि लक्ष्मीगंज के श्मशान में बच्ची को दफनाने के लिए जैसे ही गड्ढे में लिटाया उसकी आंखें खुल गईं और हाथ-पैरों में भी हलचल होने लगी. बच्ची को फिर अस्पताल ले जाया गया जहां उसका इलाज किया जा रहा है. हालांकि डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताई है. 

आपको बात दे, की कहते है न भगवन के घर देर है अदेर नहीं ठीक वैसे ही इस बारे में डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची निमोनिया और मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित है और उसकी हालत काफी गंभीर है. उसके परिजनों समझाने के बाद भी उसे डिस्चार्ज करा ले गए और कुछ घंटे बाद उसे वापस ले आए. बच्ची अभी वेंटिलेटर पर है.